आते है जाते है

आते है जाते है 
सूरज और ये चाँद  कहाँ को छुप जाते है। 
 आते है जाते है 
ये रास्ते कहाँ को मुड़ जाते है। 
निहारती थीं मेरी निगाहें जिनको 
उनके कदम कहा को डगमगा जाते है 


0 Comments