जब ज़बानों में यहाँ सोने के ताले पड़ गए.. दूधिया चेहरे थे जितने वो भी काले पड़ गए..! डूबने से पहले सूरज के निकल आता है चाँद हाथ धो कर शाम के पीछे उजाले पड़ गए..!! जब से उस पर एक चुल्लू प्यास के शोले गिरे.. तब से सारे जिस्म में दरिया के छाले पड़ गए.

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