अपनी है पर अपनी नहीं (Story)

अपनी है पर अपनी नहीं,  कहानी


अपनी है पर अपनी नहीं,  कहानी

अपनी है पर अपनी नहीं,  कहानी 



शांति रोज की तरह आज भी अपनी मालकिन की बात सुन कर नीरस सी अपना काम जल्दी जल्दी निपटा रही थी। 
आज भी शांति देरी जो आई थी।  शांति के देरी से आने पर मालकिन का पुरे दिन का तानाबाना जो बिगड़ जाता है। 
आज भी शांति को देरी होने पर मालकिन खरी खोटी सुना रही थी। और शांति, शांति से अपनी मालकिन की बात को सुने जा रही थी। 
आज मुझ  को एक जरुरी काम से जाना था और तेरे देरी से आने पर मुझे देर हो गई। मेरी सारी सहेलियां मेरा इंतजार कर रहीं होंगी। तेरा क्या है तू तो यहाँ से जा के दुसरो के घर गप्पे लड़ाएगी, इधर की बात उधर करेगी।  तुम लोगो का यही तो काम है। 
कि तभी मालकिन का फ़ोन बज उठता है। "हेलो हां मीना मैं आ रही हूँ तुम लोग किटी पार्टी स्टार्ट मत करना, मेरे आने के बाद ही स्टार्ट करना।  क्या बताऊँ मीना  मैं तो अपनी काम वाली बाई से तंग आ गई हूँ। ये रोज रोज  का नाटक है इसका, रोज रोज देरी से आती है।  ठीक है मैं आती हूँ" . 
जरा तेजी से हाथ चलाइये महारानी, मेरे पास तेरे जैसा टाइम नहीं है। 
जी मालकिन ! ये कह कर शांति अपने काम को जल्दी  निपटने  की कोशिश किये जा रही थी। 
मालकिन काम हो गया शांति ने मालकिन  कुछ देर बाद कहा। 
हो गया ठीक है, अपने बैडरूम से तैयार होकर मालकिन ने शांति से कहा। 
ये बता शांति तू रोज मेरा खून क्यों जलती है, तुजे इसमें मजा आता है क्या। मालकिन ने शांति को डांटते हुवे कहा। 
नहीं मालकिन वो मेरी तबियत कुछ खराब है न इसलिए देरी हो गई।  शांति ने बड़ी धीमी आवाज में कहा। 
मालकिन मैं हो सकता है कल  ना आ पाऊं, 
क्यों कल क्या है 
मेरी कई दिनों से तबियत ठीक नहीं है इसलिए कल डॉ के पास दिखाने की सोच रही थी। 
नहीं नहीं शांति मेरे पास पहले से ही इतने काम काम है तू आ जरूर जाना, इसके बाद किसी के यहाँ काम करने मत जाना।  ठीक है 
ठीक है मालकिन मैं देखती हूँ। और शांति दूसरे घर काम करने चली जाती है। 
अगली सुबह 8 बजे तक जब शांति नहीं आती तो मालकिन अपनी बेटी से बोलती है की आजा बेटी मेरी कुछ मदद कर दे घर के कामो में।
और उसकी बेटी बोलती है मुझे क्या नौकरानी समझा है आपने जो मैं घर के काम करूँ, मुझे पढ़ना है आप ही कर लो घर के काम। ये बात कह कर मालकिन की बेटी अपने कमरे में चली जाती है। और मालकिन के मुँह पर उसी के घर का दरवाजा बंद कर देती है।
मालकिन इस बात को  सुन कर एकदम स्तब्ध रह जाती है।
कि तभी घर के मेन डोर की बेल बजती है।
मालकिन दरवाजा खोलती है।  एक लड़की दरवाजे पर खड़ी थी।
तुम कौन हो।  मालकिन ने पूछा।
मैं शांति की बेटी हूँ, माँ की तबियत बहुत दिनों से ख़राब  है ना इसलिए माँ आज डॉ को दिखाने गई है।
वो आज नहीं आ पायेगी इसलिए मैं आज काम करने आ गई हूँ। शांति की बेटी ने कहा।
तुम्हारा नाम क्या है बेटा, और आज से पहले मेने कभी देखा नहीं तुमको। मालकिन ने पूछा।
मेरा नाम खुशबु है और मैं क्लास 10 में पड़ती हूँ।
ये कहते हुवे खुशबु घर को साफ करने में लग गई।
इधर खुशबु काम करने में लगी थी और उधर मालकिन इस सोच में डूबी हुई थी कि मेरी बेटी भी तो खुशबु के बराबर है पर खुशबु अपनी माँ का कितना ख्याल रखती है आज इसकी माँ की तबियत ख़राब है तो ये काम करने चली आई और मैने अपनी बेटी से काम में मदद करने को कहा  साफ़ मना कर दिया।
यही सब सोचते सोचते मालकिन ने खुशबु को काम करने से मना  किया और उसको घर जाने के लिए २० रुपये भी दिए ऑटो के लिए।
खुशबु बार बार मना करती रही की वो पैसे नहीं लेगी पर मालकिन नहीं मानी  और उसको घर भेज दिया।
उस दिन मालकिन ने घर का सारा काम खुद ही निपटाया।
पता नहीं मालकिन को खुशबु की आँखों में क्या दिखा।  और उसने खुशबु को बिना काम पूरा किये घर क्यों भेज दिया , ये तो मालकिन को भी नहीं पता।


========================================================================

कहानी अच्छी लगी हो तो शेयर एंड कमेंट जरूर  करें
 धन्यवाद 
हिमांशु उपाध्याय (HIM) 


अपनी है पर अपनी नहीं,  कहानी

















  

9 Comments

Thanks for Comment.