(कविता) कर ले

(कविता)  कर ले

कर ले

कर ले

थक चुके हैं इन मंजिलों के पीछे भागते भागते 
अब तो कोई प्यार की मंजिलों का पता बता दे 

कर ले

आये थे हम एक आशियाने की तलाश में 
अब तो कोई प्यार से  अपना बना ले 

कर ले

ठहर जायेंगे हम इन पथरीले रास्तो पर जाने से 
अगर  कोई प्यार से हमे रुकवा ले 

कर ले

समंदर भी यही है जमी भी यहीं है 
अब तो कोई गर्म हवाओ से मेघ बनवा ले 

कर ले

इश्क़ का इतिहास है बहुत पुराना यहाँ 
बस कोई हीर राँझा सा प्यार तो करा ले 

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हिमांशु उपाध्याय (HIM)

Email       -  Himbiker1@gmail.com  



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