वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी

वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी

वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी

वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी

वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी
शाम तो होती नहीं रात आ जाती है आज भी।
कोई बता दे कैसे रोका जाये इस दिल के जज्बात को
क्या करें  हर रोज चुपके से याद आ जाती है आज भी।
जबरदस्ती नहीं की हमने अपने दिल के साथ
पर दिलों पे पाबन्दी नहीं हो पाती  है आज भी। 
वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी
शाम तो होती नहीं रात आ जाती है आज भी।
हरगिज नहीं टूटते है वो रिश्ते कभी
जहाँ दिलो से जुड़ाव होता है आज भी।
लोग कहते है अब नहीं रहा वो प्यार दुनियां में
पर इश्क़ में सब कुछ जायज है आज भी।
वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी
शाम तो होती नहीं रात आ जाती है आज भी।
इश्क़ की नादानी इस  कदर छाई है मुझ पर
कि तेरे आगे कुछ नहीं दिखता है आज भी।
सितम  ना करो ए दुनियां वालो हम पर
मजनू की कहानी दोहराई जा सकती है आज भी।
वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी
शाम तो होती नहीं रात आ जाती है आज भी।
 

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हिमांशु उपाध्याय (HIM)
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वक़्त बेवक़्त आवाज आ जाती है आज भी

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