मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था

मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था 

मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था

मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था 



कर नहीं सकता कोई मेरी बराबरी 
मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था 
हो जाती थी मुझे देर बहुत 
पर इस आदत को ना बदल पाया करता था 
वो भी आ जाती थी किसी बहाने मीनार पे अपनी 
उसे देख कर मैं सब भूल जाया करता था 
मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था 
शायद आ जाती थी उसे आहट मेरी 
मैं भी उसे निहार कर वापस चला जाया करता था  
मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था 


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हिमांशु उपाध्याय 
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मैं अपना चाँद देखने उसकी गली जाया करता था

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