जिसे कहते है हम बचपन

जिसे कहते है हम बचपन 

जिसे कहते है हम बचपन

जिसे कहते है हम बचपन 


ना था दुनियां का कोई गम 
ना था रिश्तों का कोई बंधन 
बड़ी थी खूबसूरत वो जिंदगी 
जिसे कहते है हम बचपन 
शरारतों से थी भरी हुई 
सपनों में थी डूबी हुई 
हम अपनों के थे पास 
और तारों की थी आस 
अब अजीब सी है जिंदगी 
ना है ख़ुशी ही ना है दुखी दुखी 
माँ का था प्यार 
पापा का था दर 
भाई से होती थी लड़ाई 
ना खाई हमने कभी मलाई 
hahaha...........................
ना था दुनियां का कोई गम 
ना था रिश्तों का कोई बंधन 
बड़ी थी खूबसूरत वो जिंदगी 
जिसे कहते है हम बचपन 

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कविता किसी लगी निचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइयेगा 
हिमांशु उपाध्याय (HIM)
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जिसे कहते है हम बचपन



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