आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का

आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का (कविता)


आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का (कविता)

आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का (कविता)


"आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का
अब ना हाथ ही रहा और ना साथ ही रहा किसी का,


हिम्मत ही रफ्ता हो चली है प्यार करने की
अब तो कहानी भी नहीं अच्छी लगाती महफ़िल की,

चाहते हो मेरी जिंदगी की परेशानियों को आजमाना
मेरा हाथ थामे हर घड़ी मेरे साथ बिताना ,

तस्वीरों में कैद है वो मेरी यादें पुरानी
अब तो ढलने लगी है तेरी मेरी वो यादें सुहानी,

किसी की सोच बदली नहीं जा सकती यहाँ
अब तो मातम में ही कहेंगे कि बंदा अच्छा था ,

आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का
अब तो ना हाथ ही रहा और ना साथ ही रहा किसी का,

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धन्यवाद 
हिमांशु (HIM )
आये थे हाथ थामे इन गमो की गलियों में किसी का (कविता)

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