बेपनाह प्यार (कहानी)

बेपनाह प्यार (कहानी)  

बेपनाह प्यार

बेपनाह प्यार (कहानी)  

ये कहानी उस लड़के की है जो एक साधारण से परिवार से आता था।
लड़का का नाम रमेश था।
रमेश बहुत सीधा साधा लड़का था। उसकी पापा एक सरकारी ऑफिस में चपरासी थे। और उनकी पीने की बहुत बुरी लत थी। रमेश की माँ घर पर ही सिलाई का काम किया करती थी। और उसी से अपने घर का खर्चा चलाती थीं।  रमेश के पापा की सारी  पगार तो दारू पीने में ही ख़तम हो जाया करती थी।
इस कारण  रमेश की माँ बहुत परेशान रहा करती थी।
जब रमेश 7 साल का था तो उसकी माँ को पता चला की रमेश के पापा का गुर्दा ख़राब हो चूका है और वो कुछ ही दिन के मेहमान है।
इस खबर से तो रमेश की माँ के ऊपर दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा था।
और हुवा भी ऐसा ही।  रमेश की माँ ने जो जमापूंजी जमा कर रक्खी थी वो तो  रमेश के पापा के इलाज में ख़तम हो गए।
और वो कुछ ही दिन के बाद इस दुनिया से चल बसे।
ये तो कुछ नहीं था होनी को तो कुछ और ही घड़ित होना था।
कुछ ही दिनों के बाद रमेश की माँ को भी कैंसर का पता चला और कुछ ही दिनों में उसकी माँ भी रमेश को छोड़ कर चली गई।
अब रमेश इस दुनियां में बिलकुल अकेला था।
रमेश के मामा ने रमेश को सहारा दिया। और अपने घर ले गया।
पर मामा  के मन में तो कुछ और ही चल रहा था।
कुछ दिन बीतने के बाद ही मामा  ने रमेश के घर को बेच दिया और रमेश को घर के काम में झोंक दिया।
रमेश की मौसी से ये सब देखा नहीं गया और वो रमेश को अपने घर ले गई।
रमेश की मौसी शालू बहुत अच्छी थी , उसका भी कोई नहीं था। रमेश और शालू को एक दूसरे का सहारा मिल गया था।
रमेश के रूप में शालू को जीने का सहारा मिल गया था।
और शालू के रूप में रमेश को दूसरी माँ मिल गई थी।
रमेश अब धीरे धीरे बड़ा होने लगा था। और शालू बूढी।
अब वो समय भी आ गया था जब रमेश जो नौकरी क लिए अपनी मौसी का घर छोड़ कर झारखण्ड जाना था।
रमेश को झारखण्ड में एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई थी।
बूढी आँखों से शालू ने रमेश को बड़ी मुश्किल से विदा किया।
अब रमेश नई जगह नई नौकरी और एक नई दुनिया थी।
धीरे धीरे रमेश उस दुनिया में रमता चला गया।
उसकी आँखों में नई दुनिया की नई चमक थी।  वो अपने साथ एक झोला भर कर किताबे भी ले गया था।  क्योकि वो अभी आगे भी पढ़ना चाहता था।  पर अब कुछ अलग ही बात थी।
उसके ऑफिस में एक लड़की थी जिसका नाम था जेसिना।  जेसिना पारसी समुदाय की एक खुले विचारों वाली लड़की थी।  जो अपना जीवन अपने हिसाब से जीना चाहती थी।
जेसिना और रमेश का मेल जॉल कब दोस्ती और दोस्ती से प्यार में बदल गया दोनों में से किसी को पता ही नहीं चला।
रमेश की ये जिंदगी अब उसे बहुत अच्छी लग रही थी।
उसकी आँखों में जीवन के सपने थे जो वो जेसिना के साथ देख रहा था।
पर रमेश की आँखों में सपने मामा का दर भी था, कि वो मानेंगे या नहीं।
शालू मौसी का तो उसे पता था की वो मान जाएगी।
दिनों के तो मनो पंख लग गए थे जो बड़ी जल्दी जल्दी उड़ते जा रहे थे।
एक दिन जेसिना ने रमेश से कहा की मेरे परिवार वाले हमारी शादी के लिए नहीं मानेगे इसलिए हम लोगो को इस शहर से भाग चलना चाहिए।
रमेश तो सकपका गया और बोला की मेरी माँ तो मान जाएगी तो भागना क्यों।
पर जेसिना नहीं मानी और भागने के लिए रमेश को फ़ोर्स करने लगी।
अगले दिन जेसिना ने रमेश को एक ट्रैन का टिकट दिखते हुवे बोली की ये हमारा लाइफ का टिकट है।
आज शाम को 7 बजे दिल्ली के लिए ट्रैन है स्टेशन आ जाना मैं तुमको वहीँ मिलूंगी। दिल्ली पहुंच कर मेरे एक दोस्त के यहाँ कुछ दिन रहेंगे फिर देखा जायेगा।
रमेश को भागना नहीं भा रहा था।  वो जेसिना के घर वालो से भी बात करने के लिए तैयार था पर जेसिना इस बात के लिए नहीं राजी थी।  वो बार बार अपने घर वालो के लिए भला बुरा बता कर रमेश को डरा रही थी।
चलो बात हो गई और दोनों ऑफिस से जल्दी अपने घर चले गए।
रमेश को ना जाने क्यों ये काम नहीं अच्छा लग रहा था।
वो दुनिया से सामना करना चाहता था ना की भागना।
शाम 7 बजे जेसिना सही समय पर स्टेशन आ गई पर रमेश ने तो पहले ही अपने घर के लिए ट्रैन पकड़ ली थी और वो अपनी मौसी  रहा था।
वह जेसिना रमेश का इंतजार करती रही और उसके सामने से ट्रैन चली गई।  जेसिना ने भी हार मान अपने घर का रास्ता पकड़ लिया।
रमेश ने अपना मोबाइल बंद कर लिया। ऑफिस से 1 महीने की छुट्टी ले ली और घर आ कर दुखी मन से जीवन जीने लगा।
उसको ये समझ नहीं आ रहा था की उसने जो किया जो सही था या गलत।  रमेश अपने मन की बात भी किसी को नहीं बता पा रहा था।
ऐसे ही 1 महीना कब ख़त्म हो गया रमेश को पता ही नहीं चला।
और उसकी छुट्टियां भी ख़त्म हो गई।
उसका झारखण्ड जाने का तो मन नहीं था , पर वो जाता नहीं तो क्या करता।
अपने मन की बात वो किसी को बता नहीं सकता था , नौकरी छोड़ता तो क्यों छोड़ी नौकरी इस प्रश्न का भी कोई उत्तर उसके पार नहीं था।
वो वापस झारखण्ड चला गया और ऑफिस ज्वाइन करते ही उसको जो खबर मिली उससे तो उसके पैरो  तले जमीन ही खिसक गई।
पता चला की जेसिना उसके ऑफिस के दूसरे साथ काम करने वाले लड़के के साथ भाग गई।
अब रमेश को कुछ भी समाज नहीं आ रहा था।
वो अपने फैसले पर खुश भी था और दुखी भी था।

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हिमांशु उपाध्याय

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