Mere Dar ki Kahani (मेरे डर की कहानी )

मेरे डर की कहानी 

पात्र :-
१ - मै 
२ - मेरी पत्नी 
३ - सुहाना ( मेरे ताऊ जी की लड़की )
४ - किमी ( मेरी बेटी)

करीब ६ साल पहले ६ सितम्बर की एक शाम को मेरे और मेरी पत्नी के साथ जो भी हुवा उसे मैं  और साथ ही वो  कभी नहीं भूल सकते।  मुझे और मेरी पत्नी  को करीब देर रात किसी  दोस्त के यहाँ पार्टी में जाना था।  तो मैं और मेरी पत्नी रात को मेरी कार से उस पार्टी में जाने  लिए निकले।  मेरी बेटी छोटी थी  इसलिए मेने उसे साथ ले  जाना सही नहीं समझा और उसे अपनी ताऊ  की लड़की के साथ घर पर ही छोड़ कर हम चले गए।  मेरी पत्नी ने उसे दूध पीला कर सुला दिया था।  हमें देर भी इसी कारण  हुई थी क्योकि उसे सुला के ही  हम जा सकते थे।  नहीं तो वो सुहाना को को बहुत परेशांन  करती। सुहाना मेरे ताऊ जी की लड़की का नाम है  जो  हमारे साथ ही हमारे घर में रहती थी। किमी के सोने के बाद हम निकल आये और सुहाना बहार के कमरे में टीवी देखने लगी।  कुछ देर के बाद सुहाना ने घर के लैंडलाइन से मुझे फ़ोन किया और कहा की चाचा जी यहाँ टीवी सही नहीं आ रहा है तो क्या में आपके बैडरूम में लगे टीवी चालू करके देख लूँ।  मेने कहा हाँ देख लो पर किमी को देखती रहना कहीं उठ न जाये।  सुहाना ने कहा ठीक है चाचा जी में देखती रहूंगी और फ़ोन कट गया।  हम पार्टी में मशगूल हो गए।  थोड़ी देर के बाद सुहाना ने मुझे फिर से फ़ोन किया और कहाँ की चाचा जी मुझे बहुत दर लग रहा है।  सुहाना पहने भी कई बार घर पर अकेली रह चुकी है तो हमलोगो को पहले तो मजाक लगा पर जब उसने कहा की आप के बैडरूम में जो डोल (गुड़िया) रक्खी है वो बहुत अजीब है मैंने अपनी पत्नी की तरफ जा कर पूछा की अपने बैडरूम  में कोई डोल  रक्खी है क्या तो उसने तो न करते हुए सिर  हिला दिया मेने जैसे ही सुहाना से बात करने के लिए फ़ोन कान पर लगाया उधर से एक जोर की आवाज के साथ एक तीखी हंसी मेरे कानो को मनो फाड़ ही डालती पड़ी  और फ़ोन कट गया।  फिर में कई बार घर पर फ़ोन मिलता रहा पर पूरी पूरी बैल जाने के बाद भी कोई फ़ोन नहीं उठा रहा था।  हम जितनी तेजी से हो सकता था घर पहच सकते थे हूं पहुंचे और घर का टाला घोल कर हम जैसे ही अंदर घुसे तो हमारी आंखे फटी की फटी ही रह गई।  सुहाना बेसुध फर्श पर पड़ी है और मेरी बेटी उसी डोल  के साथ खेल रही है। मेने तुरंत डॉ को फ़ोन करके बुलाया। सुबह  होते ही मैंने वो डोल शहर  के बाहर  एक नदी में बड़े पत्थर के साथ बांध कर फ़ेंक दी। अब हम तो ठीक हैं पर सुहाना आज भी वो रात याद करके सिहर उठती है और अब वो हमारे घर पर नहीं रहती। 

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