समय से पाबन्द

समय से पाबन्द 

समय से पाबन्द


समय से पाबन्द 


समय से पाबन्द ना थे हम
पर इस ज़माने ने हमे बना दिया।

आँखों में सितारे हमारे भी थे
पर ग्रस्थि के बादलो ने सब छुपा दिया।।

दूसरे जिया करते थे सपने हमारे
गद्दारी क्या होती है सब समझा दिया।

अमीर हो चले वो लोग
जिनको हमने जीना सिखला दिया।।

समय से पाबन्द ना थे हम
पर इस ज़माने ने हमे बना दिया।



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थन्यवाद 
हिमांशु उपाध्याय 




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