कविता कहानी

कविता कहानी 

तुम उस चाँद की तरह हो जो हर वक़्त सामने जरूर होता है पर पास नहीं।  
याद भी उसी तरह है जो हर वक़्त सताती है तुम्हारी पर रुलाती  नहीं। 
मन  में आता है दौड़ कर पकड़ कर कस लूँ तुम्हे पर तुम पास नहीं। 
ये दूरियां क्यों है हर वक़्त हमारे बीच पर कोई ये बताता नहीं।  
तुम उस चाँद की तरह हो जो हर वक़्त सामने जरूर होता है पर पास नहीं।  

2 Comments

Thanks for Comment.