छलावा

छलावा 

छलावा ?

क्या होता है ये छलावा ?

छलावा  वो शब्द है जो आप सब ने सुना तो जरूर होगा पर शायद कभी समझा ना हो और हो सकता है की आप में से बहुत से लोगो को ये छलावा चीज के बारे में सुना  भी हो। 
छलावा ना तो किसी  चुड़ैल की तरह औरत के रूप में दिखती है और ना ही किसी पिसाच आदमी के रूप में दिखता है।  ये तो वो है जो किसी का भी रूप ले सकता है. 

आज मैं  जिस कहानी को बतानेजा रहा हूँ वो छलावा की ही है।  पर सोचा कहानी शुरू करने से पहले छलावा के  बारे में थोड़ा बता दूँ।  

तो कहानी शुरू करते हैं। 

ये कहानी मुझे मेरे दोस्त ने बताई है जिसका नाम सुबोध है।  

सुबोध एक अच्छा लड़का होने के साथ साथ एक अच्छा दोस्त भी है। 

कुछ सालो पहले में और सुबोध एक साथ स्कूल जाया करते थे सुबोध मेरे घर के सामने वाली रोड  ही स्कूल के लिए जाया करता था।  मैं  सुबोध का इंतजार  करता और सुबोध के आने  के बाद हम साथ साथ स्कूल जाया करते थे।  मेरा घर स्कूल से पास ही था पर सुबोध का घर स्कूल से काफी दुरी पर था पर वो पैदल ही स्कूल आया करता था।  और शाम को स्कूल की छुट्टी होने के बाद हम एक साथ मेरे घर तक  आया करते थे मैं अपने घर पर रुक जाता और सुबोध अपने घर के लिए चला जाता।  

एक दिन की बात है रोज की तरह मैं  स्कूल की छुट्टी होने के बाद  आपने घर पर रुक गया और सुबोध अपने घर के लिए निकल पड़ा।  सुबोध को गाना गाना बहुत पसंद था वो रोज कोई न कोई नया गाना गुनगुनाता ही आता और शाम को गुनगुनाता वापस घर के लिए जाता।  

मेरे घर से उसके घर के रास्ते में एक आम के पेड़ो का बड़ा सा बाग़ था।  सुबोध उसी आम के बाग़ से अपने घर के लिए जाया करता था।  उस   दिन सुबोध अपने घर कोई गाना गुनगुनाता जा रहा था।  उसे उस  बाग़ में अचानक महसूस  हुवा की कोई उसे घूर  (देख ) रहा है।  उसने इधर उधर देखा पर उसको कोई नहीं दिखाई दिया।  
फिर वो कुछ ही कदम आगे बड़ा तो उसने अपने से  कुछ दुरी पर एक ३-४ साल के लड़के को खड़ा देखा। 
उस लड़के के शरीर पर एक भी कपडा नहीं  था।  वो एकदम नंगा खड़ा था और रोये जा रहा था।   सुबोध सोचने लगा कि  अभी तक तो इस बाग़ में कोई नहीं था ये लड़का अचानक कहाँ  से यहाँ  आ गया। सुबोध ने आज तक उस बच्चे को कभी देखा था।  

सुबोध सोचने  लगा की हो सकता है ये बच्चा किसी आसपास के गांव  का होगा जो अपने  घर का रास्ता भूल या भटक कर यहाँ  चला आया होगा।  
वो बच्चा लगातार रोये जा था और सुबोध की तरफ ही देखे जा रहा था।  
सुबोध यही सब सोचता हुवा कुछ कदम आगे बड़ा ही था तब तक सुबोध के पीछे से एक आदमी अपनी मोटरसाइकल से आकर सुबोध के पास रुका और  सुबोध से पूछा की क्या हुवा बेटा। वो आदमी सुबोध के गांव का ही था। 

सुबोध तो पहले से ही काफी हद तक डरा था और एकाऐक उस आदमी के बोलने से तो सुबोध की हालत ख़राब हो गई।  किसी तरह सुबोध ने अपने आप को सँभालते हुए कहा की देखिये न अंकल ये बच्चा बहुत देर से रोये जा रहा है और  ये बच्चा कहाँ से यहाँ आया पता नहीं।  वो  आदमी अब तक अपनी गाड़ी  से उतर  चूका था। 

 सुबोध और वो आदमी उस लड़के की तरफ बढ़ ही रहे थे कि अचानक वो बच्चा जोर जोर से हसने लगा और उसकी हसी ३-४ साल के लडके की नहीं थी उसकी हंसी की आवाज ३० से ४० साल के आदमी जैसी लग रही थी। 

ये सब क्या हो रहा है ये सुबोध और वो आदमी  समझ पते इससे पहले ही वो बच्चा गायब हो गया। 
इस घटना से सुबोध और  वो आदमी बहुत डर गए। सुबोध तो दर डर  के मारे कांपने  लगा। 

उस आदमी ने अपने होश को सँभालते हुए सुबोध को चिल्लाते हुवे तुरंत गाड़ी पर बैठने के लिए कहा और वो दोनों वहां से भाग गए। 
उस आदमी ने सुबोध को घर पहुंचने के बाद बताया की वो  छलावा था जो कुछ भी कर  सकता था। 

उस घटना के बाद सुबोध ४ दिन तक बुखार में तड़पता रहा  और उसके बाद वो अपने पापा के साथ ही मेरे घर तक आता और स्कूल  की छुट्टी होने के बाद अपने पापा के साथ ही अपने घर जाता।

 


तो ये थी सुबोध की कहानी। ..... 

अच्छी लगी हो तो कमेंट करके जरूर बताइयेगा। 
हिमांशु उपाध्याय 



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