आधी है रूह आधा है जिस्म आधी है ये जिंदगी (कविता)

आधी है रूह आधा है जिस्म आधी है ये जिंदगी (कविता)


आधी है रूह आधा है जिस्म आधी है ये जिंदगी (कविता)


आधी है रूह आधा है जिस्म आधी है ये जिंदगी,
तुम मेरे नहीं तो किसी के नहीं ऐसी है मेरी बंदगी,

आधे है शब्द आधे है लफ्ज आधी  है ये दिल्लगी,
तू है मेरा मैं हूँ तेरी ऐसी है मेरी सादगी,

कई सदियां काटी है मैने तेरे प्यार में,
यकीं है हमे भी अपने इस इंतजार में,


बिखर जाउंगी मैं बादलों की तरह,
तलाशते रहना मुझे आवारों की तरह,


आधी है रूह आधा है जिस्म आधी है ये जिंदगी,
तुम मेरे नहीं तो किसी के नहीं ऐसी है मेरी बंदगी।

========================================================================

कविता अच्छी लगी हो तो निचे कमेंट बॉक्स में अपने सुझाव अवश्य दे। 
धन्यवाद 
हिमांशु उपाध्याय 
आधी है रूह आधा है जिस्म आधी है ये जिंदगी (कविता)


0 Comments