बचपन

बचपन

कैसे थे वो बचपन के दिन 
वो शरारतें वो शैतानियां 
वो किसी भी बात पर रूठ जाना 
फिर किसी के मनाने पर भी ना मानना 
और एक टॉफी के लालच में मान जाना 
कैसे थे वो बचपन के दिन 
वो बिना सोचे किसी से भी बोल देना 
वो पापा के स्कूटर पर बैठते ही घूमने की जिद करना 
फिर पापा के साथ कुछ दूर हवा से बातें करना 
और वापस आकर मम्मी से नजरें चुराना 
कैसे थे वो बचपन के दिन 
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धन्यवाद

हिमांशु उपाध्याय


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