क्या मैं चोर था ??

क्या मैं चोर था 

क्या मैं चोर था   क्या चोर ही रहूंगा जीवन भर


क्या मैं चोर था
क्या चोर ही रहूंगा जीवन भर
मैंने चुराए पेड़ो से नीबू आमों को
मैंने चुराए दुसरो के सपने हज़ारो को 
मैंने चुराए जल से मछलियों को

क्या मैं चोर था
क्या चोर ही रहूंगा जीवन भर
क्या क्या चुराया अब तो पता नही
क्या पाया क्या ना पाया ये पता नही
अब तो गलता है जीवन यू ही चलेगा
सामना करना है जीवन का यू ही चलेगा।

क्या मैं चोर था
क्या चोर ही रहूंगा जीवन भर
मैंने चुराय लोगो की आँखों से आँसुओ को
मैंने चुराय दर्द हज़ारो तकलीफो को
मैंने चुराय बगीचों से फ़ुलो को।


क्या मैं चोर था
क्या चोर ही रहूंगा जीवन भर
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हिमांशु उपाध्याय
क्या मैं चोर था  क्या चोर ही रहूंगा जीवन भर

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