कहानी नीता की

Nita कहानी नीता की 


जो दीखता है वही बिकता है  इस कहानी पर ये कहावत बिलकुल सटीक बैठती है।

# नीता एक बहुत अच्छी और पड़ने में तेज लड़की थी। 
उसका जन्म बिहार  के एक छोटे से गांव में हुवा था।  उसके बाउ जी  की कुछ जमींन थी जिस पर उनका और उनके परिवार का भरण पोषण होता था। 
नीता 3 बहन और एक भाई थे। सभी का जीवन बहुत कष्टकारी था।  कभी कभी तो दो जून की रोटी भी नसीब न हो पति थी। पर परिवार इतने दुःख झेलने के बाद भी कुछ था। और नीता के जन्म के बाद केशव ( नीता के बाऊ जी ) को गांव के बहार के लोग भी जांनने पहचानने लगे थे। नीता  अलग बात थी।  वो एकदम कहानियो की  परियों की तरह लगाती थी।  
नीता बचपन से ही बहुत शर्मीली थी।  
नीता  सभी  से  अलग थी। नीता की जिंदगी कल्पनाओ भरी थी । एक ऐसी कल्पनाओ की दुनिया जिसके अंदर कभी कभी नीता बिना देखे बिना समझे सात समुद्र पर भी चली जाया करती  थी, बचपन होता ही है कुछ ऐसा। 
नीता अपने भाई बहन में सबसे छोटी थी इसलिए सबकी लाड़ली भी थी। 
नीता की आंखे हलके भूरे रंग से सराबोर थी।  उसकी आँखों को देखने से लगता था कि वो उसे मंत्रमुग्ध कर रही है जो उसे देख रहा है।  उसके बाल काले रेशमी मानो काली रात का साया हो।
 उसके गोर रंग पर ये आंखे और उसके बाल तो देखते ही बनते थे। उस गांव की सबसे खूबसूरत  बिटिया थी नीता। 
उसके बाऊ जी  कभी कभी उसे अपने साथ खेतो पर भी ले जाते। जब भी नीता को कोई देखता तो उसके मुँह से अकस्मात ही निकल पड़ता,  बहुत अच्छी बिटिया पाए हो केशव। 
नीता की खूबसूरती के चर्चे अब दूसरे गांवो में भी होने लगे थे। 
सब नीता के साथ खेलना उसको दुलराना चाहते थे।  नीता पुरे गाँव की दुलारी हो गई थी।

उस साल अच्छी बारिश ना होने के कारण फसल अच्छी ना हो पाई।  जिससे की केशव के ऊपर बहुत कर्जा हो गया।  केशव बहुत परेशांन था इस कर्ज़े से।  इसलिए केशव ने शहर जा कर मजदूरी करके कुछ रुपये कमाने की सोची और एक दिन वो परिवार को गांव में छोड़ कर  शहर के लिए रवाना  हो गया।
केशव अब शहर में ही रहकर मेहनत मजदूरी कर रहा था।  शहर में रहते हुवे उसको अपने ठेकेदार के बारे में पता चला जिसकी कोई संतान नहीं थी।  काम करते करते केशव और ठेकेदार की अच्छी जान पहचान हो गई थी।
  अब केशव को वो ठेकेदार कभी कभी  कुछ काम होने पर अपने घर भी भेज दिया करता था, जिससे की ठेकेदार का परिवार भी केशव को जान गए थे।  एक दिन केशव ठेकेदार का खाना लेने उनके घर गया हुवा था। खाना बनने में कुछ देर थी तो ठेकेदार की पत्नी केशव से उसके परिवार के बारे में पूछने लगीं।  केशव ने बताया की उसके 4 बच्चे है जो  गॉव में रहते है। केशव ने सभी का नाम बताते हुवे सबसे छोटी बिटिया नीता के बारे में भी बताया।  नीता के बारे में सुन कर ठेकेदार की पत्नी  से मिलने का मन होने लगा।  कभी लाओ नीता को यहाँ, कह कर ठेकेदार की पत्नी उदास मन से घर के अंदर चली गई।
केशव ने उनकी उदासी को भाप लिया था, पर केशव क्या कर सकता था।
कुछ दिनों के बाद केशव छुट्टी पर अपने घर जाने को हुवा तो ठेकेदार की पत्नी का  मन हुवा की चलो केशव का गॉव घूम आते है। ठेकेदार के केशव से बात की तो केशव ने हाँ करने में देरी ना की।
सभी लोग ठेकेदार की  गाड़ी से केशव के गांव पहुंचे।  केशव की पत्नी ने सभी का आव भगत किया।  ठेकेदार की पत्नी नीता से मिल कर बहुत खुश हुई और नीता को कुछ दिन अपने यहाँ ले जा कर रहने के लिए कहने लगी।  केशव ने तो कोई ना नुकुर नहीं किया पर नीता की माँ को ये बात ना भाई, पर केशव के बताने पर की ठेकेदार को कोई संतान नहीं है वो भी मान गई।
नीता अब ठेकेदार की पत्नी के साथ शहर आ चुकी थी।  ठेकेदार की पत्नी ने अपने वो सरे अरमान नीता के ऊपर न्योछावर कर दिए जो उसके मन में सदियों से एक बच्चे के लिए दबे हुवे थे।
नीता भी नए खिलोने , नए कपडे , अच्छा खाना पा कर बहुत खुश थी।  जब केशव गांव से फिर शहर आया तो वो नीता को पहचान  ही नहीं  पाया।  नीता एक दम बदल चुकी थी। नीता गुड़िया की तरह लग रही थी।
नीता को देख कर केशव की आँखों में आंसू आ गए।
 कुछ दिन बीतने के बाद केशव नीता को वापस ले जाने  को कहने लगा तो ठेकेदार की पत्नी ने ये कह कर टाल  दिया कि  अभी कितने  दिन हुवे है इसे आये हुवे।
असल बात तो ये थी की ठेकेदार की पत्नी का बिलकुल भी मन नहीं था नीता को वापस  भेजने का।
वो भी क्या करे नीता थी ही इतनी अच्छी और एक बिन औलाद की माँ की पीड़ा वही समज सकती है।
 अब नीता का भी मन यहाँ लग गया था।  ठेकेदार की पत्नी ने अपने पति से केशव से बात करने के लिए कहा की वो नीता को उनको गोद लेना चाहती है और  हम नीता  स्कूल में भेजेंगे, अच्छा लालन पोषण करेंगे, जिससे वो बड़ी होकर कुछ बन पायेगी। ठेकेदार ने केशव से इस पर बात की तो वो कुछ बोला नहीं। कुछ देर के बाद केशव ने नीता की माँ से बात करके बताने के लिए कहा और काम पर लग गया।
इधर नीता ख़ुशी ख़ुशी यहाँ शहर में रह रही थी।
उधर नीता के लिए नीता की माँ और पूरा गांव परेशान था।

फिर एक दिन केशव अपने घर गया और ठेकेदार ने जो बात कही थी वो अपनी नीता की माँ को बोला।
मैंने उसे जन्म दिया है में ऐसे कैसे दे दूँ उसे किसी को, तुम ये बात कैसे बोल सकते हो नीता के बाउ जी।  
ये बात सुनकर तो  नीता की माँ अपने आपे से ही बाहर हो गई। 
नीता की माँ ने साफ इंकार करते हुवे कहा हम बिटिया नाही बेचित। फिर केशव ने नीता की माँ को नीता की  गुड़िया जैसी फोटो दिखते हुए कहा की हम गरीब लोग नीता को ये सब कहाँ दे पाएंगे। जाने दो नीता को उन्ही के पास। वो नीता का भरण पोषण और उसको एक अच्छी शिक्षा दीक्षा दे पाएंगे, जिससे नीता का जीवन सुंदर और सुधर जायेगा।
नीता की माँ बहुत रोइ पर उसको भी अहसास था की सही में हमारी ये गरीबी नीता को दो जून  की रोटी तो दे नहीं पायेगी, हम क्या उसको पढायेंए लिखाएँगे।
कुछ समय के बाद उसको भी मानना पड़ा। नीता को ठेकेदार ने गोद ले लिया। ठेकेदार की पत्नी अब बहुत खुश थी।
पर नीता से मिलने जुलने के लिए उसने कभी भी किसी को रोका टोका नहीं।
पर इस बात का  केशव मन के ऊपर बहुत बड़ा असर पड़ा।  उसको लगने लगा था की उसने अपने पहले तीन बच्चो के साथ अन्याय तो नहीं किया  है।
आप को क्या लगता है।

=======================================================================
कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताइयेगा। 
हिमांशु उपाधयाय (HIM)






















3 Comments

  1. Kahani bahut achhi hai but sayad nita ke dad ne jo apne 3 bachho ke sath kiya wo sayad hi galt hai

    ReplyDelete
  2. Nita ki to life ban gai par un teeno ka kya huwa

    ReplyDelete

Thanks for Comment.