प्यार कहाँ गया

प्यार कहाँ गया


प्यार कहाँ गया
ये कोई ना जान पाया
जीवन की आपाधापी में कहीं खो गया
सोचा था जो वो मिल नहीं पाया
तमन्नाओ के दरियां पर लगाम ना लग पाया
जीवन के हौसलो के आगे कोई टिक  नहीं पाया
प्यार कहाँ गया
ये कोई ना जान पाया

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कविता अच्छी लगी हो तो सहरे जरूर करें 
हिमांशु उपाध्याय 






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