समय की धारा

समय की धारा

 कभी कभी समय से विपरीत कोई काम किया जाये तो क्या क्या नहीं हो सकता। 
हीरा  हलवाई आज सबेरे सबेरे गुनगुनाता हुवा समोसे ताल रहा था।  अहाहा क्या खुशबु आ रही थी उसके समोसो की।  पुरे मोहल्ले में मानो समोसे ही समोसे तले जा रहे हो। 
हीरा  हलवाई अपने काम में इतना व्यस्त था की ज्ञानेश बाबू जी कब उसकी दुकान पर आ गए हीरा को पता ही नहीं चला। 
राम राम हीरा कैसे हो ज्ञानेश बाबू ने पूछा। ज्ञानेश बाबू जी की आवाज सुनकर हीरा चौक कर उनकी  तरफ देखता है और राम राम बोलता है। 
क्या हुवा आज बहुत चौक रहे हो और आज सूरज किस ओर से निकला है। 
कुछ नहीं बाबू जी में मैं समोस बनाने में इतना खोया हुवा था की आप की तरफ ध्यान ही नहीं गया। 
वो तो मुझे पता ही है तुम इतने प्रेम से इस समोसो को तल रहे हो की इसकी महक पुरे मोहल्ले में फ़ैल रही है - "ज्ञानेश बाबू जी बोले" . 
पर ये बताओ आज "इमरती" की जगह तुम ये समोसे क्यों ताल रहे हो। तुम तो रोज सुबह पहले इमरती  बनाते हो। 
वो कुछ नहीं बाबू जी कल शाम को वर्मा जी आ कर कह गए थे की सुबह एक घन समोसे बना देना। 
हीरा बोला। 
क्यों वर्मा जी के यहाँ कोई मेहमान आएं हुवे है क्या।  उत्सुकता से बाबू जी ने पूछा। 
नहीं नहीं बाबू जी उनका लड़का राहुल 4 साल के बाद अमरीका से आया है ना तो उसी के लिए कह गये थे, हीरा ने उत्तर दिया। 
कौन  राहुल ! वो कब आया। 
कल सबेरे सबेरे ही तो आएं  है बाबू जी। हीरा बोला। 
अच्छा यह तो बहुत अच्छी खबर दी तुमने।  वर्मा जी ने बताया भी  नहीं। बाबू जी बोले। 

छोटे शहरों के मोहल्लो में कुछ ऐसा ही माहौल रहता है।  मानो  पूरा मोहल्ला एक दूसरे को जानता हो। 
चाहे वो हीरा की मोहल्ले की दुकान हो या 5 घर छोड़ के बाबू जी का घर। सब एक दूसरे के होते है। 
सब अपने से होते है। 

हीरा ला ये समोसे मैं ही दे आता हूँ वर्मा  जी के यहाँ। इसी बहाने राहुल और वर्मा जी से भी मिल लूंगा। बाबू जी ख़ुशी से बोले। मानो उनका ही लड़का चार साल बाद अमेरिका से वापस उनके घर आया हो। 
हाँ हाँ बाबू जी आप वर्मा जी के यहाँ ये समोसे दे आइये तब तक मैं आप की इमरती भी बनाये देता हूँ। हीरा बोला। 
हीरा ने झटपट समोसे एक अखबार में लपेटे और उसे पन्नी में पैक करके बाबू जी को दे दिए। 
बाबू जी बहुत तेजी से वर्मा जी के घर की तरफ बढ़ चले। 
वर्मा जी के घर पहुंचने में बाबूजी को देर ना लगी।  बाबू जी ने घर के बाहर लगी बेल  को बजाया। 
वर्मा जी ने दरवाजा खोला।
 और वर्मा जी  कैसे हैं आप और मैं आप से बहुत नाराज हूँ अरे चार साल बाद लड़का घर आया और आप ने बताया भी नहीं। बाबू जी एक ही सांस में ये सब बोल गए। 
अरे ऐसी बात नहीं है बाबू जी वो कल ही आया है ना तो बताने का मौका ही नहीं मिला। वर्मा जी बोले। 
अरे भला हो उस हीरा का नहीं तो पता भी ना चलता कि  राहुल आया है, और ये लीजिये आप ने जो समोसे बनाने के लिए कहे थे हीरा को वो लेता आया हूँ।  बाबू जी बोले। 
अरे इसकी क्या जरुरत थी, हीरा लेता आता। वर्मा जी बोले। 
अरे मैं इमरती खाने गया था, तो हीरा ने बताया, तो मैं लेता आया, आप कहें तो वापस ले जाऊं।  बाबू जी हस्ते हुवे बोले। 
ठीक है आइये अंदर तो चलिए। 
बाबू जी सोफे पर बैठते हुवे बोले बुलाइये राहुल को  मिल लूँ, जरा हम भी तो जान लें कि कैसा  है अमेरिका। 
वर्मा जी, जी जी संकुचाते हुवे धीमी आवाज में बोले बीटा राहुल इधर तो आना। 
आता होगा, आप क्या लेंगे चाय या कॉफ़ी।  वर्मा जी बाबू जी बोले। 
हम तो चाय पिएंगे वो भी समोसो के साथ, हा  हां हां हां।    बाबू जी है पड़े। 
ठीक है, अरे सुनो जरा, बाबू जी आएं है चाय लेती आओ जरा, वर्मा जी बोले। 
कुछ समय बीतने के बाद भी जब राहुल बाहर  ना आया तो बाबू जी ने वर्मा जी से कहा की राहुल नहीं आया अभी तक, और बाबू जी  राहुल राहुल आवाज देने लगे। 
कि  तभी अंदर से जोर से चीखने की आवाज आई "क्या है " . 
बाबू जी ने वर्मा जी की तरफ देखा, तो वर्मा जी अपनी परेशानी छुपाते हुवे बोले, शायद बीजी होगा , इसलिए नहीं आ पा रहा है। 
बाबू जी ने अपना सर ऐसे हिला दिया मानो वो सब समज गए हो। 
फिर बाहरी कमरे में सन्नाटा छा  गया। 
ना कुछ बाबू जी बोले और ना ही वर्मा जी कुछ बोले। 
राहुल के कमरे से जोर जोर से चीखने चिल्लाने की आवाजें तेज होती जा रही थीं। लग रहा था कि  वो किसी लड़की से फ़ोन पर बात कर रहा था। 
बाबू जी ने चाय पी और वर्मा जी से हाथ जोड़ कर नमस्ते करते हुवे उनके घर से बाहर निकल गए। वर्मा जी भी अपने घर  दरवाजे पर हाथ जोड़ कर काफी समय खड़े रहे। 
दुखी मन लिए बाबू जी अपने घर की तरफ चल पड़े, हीरा की दुकान के सामने से निकलते हुवे, हिरा ने आवाज दी अरे बाबू जी आप की इमरती बन गई है आइये। 
 बाबू जी ने हीरा की तरफ बिना देखे ही कहा। 
समय की धारा अब बदल चुकी है अब सीधा खाना ही खाऊंगा। 


 



























 

































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