आसमान सा

आसमान सा



दिखता  है बहुत कुछ आसमान सा
होता नहीं सब कुछ आसान सा

रखना पड़ता है दिल पत्थरों जैसा
देना पड़ता है  बहुत कुछ किश्तों जैसा

ऐसा कुछ तो  हो इस दुनियां में
ना मिले बन्दे किसी योजनां में

फुर्सत के पल अब नहीं मिलते है घरों में
दिन रात बीत जाता है दफ्तरों में

दिखता  है बहुत कुछ आसमान सा
होता नहीं सब कुछ आसान सा


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हिमांशु उपाध्याय 




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