कहानी सुरति की

कहानी सुरति की 



आज जो कहानी मैं आप लोगो को बताने जा रहा हूँ , वो कहानी एक बहुत ही भोले भाले आदमी की है जो की पेशे  से एक किसान हुवा करता था।  किसान, किसान शब्द सुनते  ही आज कल के मॉडर्न समाज में एक गरीब, फटे पुराने कपडे पहना हुवा आदमी, जो की किसी साहूकार के उधर के बोझ टेल दबा हुवा है, बेसहारा ऐसी ही एक तस्वीर बनती हैं। और ये सही भी है।  आज के समाज में हम रेस्त्रां में जाकर वेटर को ज्यादा से ज्यादा टिप तो दे सकते है पर किसी किसान से खरीदा हुवे अनाज के बदले एक पैसा ज्यादा नहीं दे सकते, उल्टा हम उसमे भी ये सोचते है की कुछ इसमें से भी बचा लें। 
तो चलिए कहानी की सुरुवात करते है।
कहानी है सुरति किसान की, उसके बाबू जी भी किसान थे, उसके पर दादा जी भी किसान थे, अब वो भी किसान ही हैं।
सुरति बचपन से ही बहुत ज्यादा सीधा साधा था।  उसे उसने अपने बाबू जी को अपने बचपन से ही मेहनत से किसानी करके पैसा कमाते देखा था।  सुरति जब कुछ बड़ा हुवा तो उसका नाम गांव  पाठशाला में लिखवा दिया गया।  सुरति की बाबू जी और माँ दोनों ही पढ़े लिखे नहीं थे।  पर ज्यादा पढ़ाई का बोल बाला नहीं हुवा करता था।
सुरति ने भी अपने बाबू जी के साथ  मन लगाना सुरु किया, और सुरति इसी तरह बड़ा होने लगा। सुरति के गांव और घर दोनों ही जगह पढ़ने  लिखने का माहौल ना होने के कारण  सुरति भी ना पढ़  सका और सातवीं में तीन बार फ़ैल होने के कारण पढ़ाई से नाता छूट गया।
स्कूल से नाता छूटने के बाद सुरति भी अपने बाबू जी के साथ अपनी जमींन को अपने पसीने से सींचने लगा।
बाबू जी की तबियत अब कुछ ख़राब रहने लगी थी।  बाबू जी ने  अचानक बिस्तर पकड़ लिया।  सुरति और  उसकी माँ उनको गांव के ही बंगाली डॉक्टर को दिखते थे और डॉक्टर उनको दवा देकर वापस घर भेज देता था। एक दिन वो भी आया जब सुबह  बाबू जी की आंख ही नहीं खुली। 
सुरति  उस समय 14 साल का ही था।  सुरति के एक चाचा जी भी थे जो तीन गांव छोड़ कर रहा करते थे। 
 बाबू जी का सारा काम करवाने के बाद अब इस बात की फ़िक्र  थी की अब घर का राशन पानी कैसे चले गए।  गाँव  वालो की तो बुरी नज़र थी ही  सुरति के बाबू जी की आठ बीघा जमीन  पर  जो की अब सुरति की हो गई थी। सुरति और सुरति की माँ ने एक न सुनी गांव वालो की।  गाँव वाले चाहते थे की वो लोग अपनी जमीन  औने  पौने दाम में बेच कर बाबू जी के भाई के यहाँ जा कर बस जाएँ। 
पर सुरति  बाबू जी से जो कुछ भी खेती  के बारे में सीखा था उसने  वैसे ही खेती शुरू की।  और देखते ही देखते समय कब बीत गया किसी को पता ही नहीं चला। सुरति अब एक मंझा हुवा किसान बन चूका था और अब उसकी उम्र भी 21 साल की हो चली थी।  सुरति की माँ ने सुरति के लिए एक अच्छी लड़की देख के सुरति की शादी कर दी और सुरति अब ख़ुशी ख़ुशी जीवन यापन कर रहा है। 
ये एक सच्ची कहानी पर आधारित कहानी है।  आप लोगो को भारत के हर एक गांव में कोई  सुरति जरूर मिल जायेगा। हां फर्क इतना है की कोई सुरति  अपने बुरे वक़्त पर गलत काम करके गलत राह पर चला जाता है और कोई अपने आप को और अपने परिवार को संभाल  लेता है।  . .

-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

सुरति की कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट जरूर करें और इस कहानी को शेयर भी करें। 
हिमांशु उपाधयाय 

6 Comments

Thanks for Comment.